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वाल्मीकि रामायण 41.65

बलेन येन वै सीतां मायया राक्षसाधम ।
मामतिक्रामयित्वा त्वं हृतवांस्तन्निदर्शय ।। ६.४१.६५ ।।।।

पूरा अध्याय