ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 3838.15वाल्मीकि रामायण 38.15ददृज़ुह् ज़िखरे तस्य विषक्ताम् इव खे पुरीम् । ताम् ज़ुभाम् प्रवत द्वाराम् प्राकार वर ज़ोभिताम् ।। ६-३८-१५।।पिछलाअगलापूरा अध्याय