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वाल्मीकि रामायण 38.14

अध्यारोहन्त ज़तज़ह् सुवेलम् यत्र राघवह् ।
ते त्व् अदीर्घेण कालेन गिरिम् आरुह्य सर्वतह् ।। ६-३८-१४।।

पूरा अध्याय