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वाल्मीकि रामायण 35.2

तम् निनादम् निशम्य अथ रावणो राक्षस ईश्वरः ।
मुहूर्तम् ध्यानम् आस्थाय सचिवान् अभ्युदैक्षत ॥६-३५-२॥

पूरा अध्याय