ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 3434.21वाल्मीकि रामायण 34.21दीयताम् अभिसत्क्र्त्य मनुज इन्द्राय मैथिली । निदर्शनम् ते पर्याप्तम् जन स्थाने यद् अद्भुतम् ॥६-३४-२१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय