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वाल्मीकि रामायण 34.20

जनन्या राक्षस इन्द्रो वै त्वन् मोक्ष अर्थम् बृहद् वचः ।
अविद्धेन च वैदेहि मन्त्रि वृद्धेन बोधितः ॥६-३४-२०॥

पूरा अध्याय