Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 33.7

लीनया गनहे शूह्ये भयम् उत्सृज्य रावणात् ।
तव हेतोर् विशाल अक्षि न हि मे जीवितम् प्रियम् ।। ६-३३-७।।

पूरा अध्याय