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वाल्मीकि रामायण 33.4

सा ददर्श सखीम् सीताम् सरमा नष्ट चेतनाम् ।
उपावृत्य उत्थिताम् ध्वस्ताम् वडवाम् इव पांसुषु ।। ६-३३-४।।

पूरा अध्याय