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वाल्मीकि रामायण 33.39

गिरि वरम् अभितो अनुवर्तमानो ।
हय इव मण्डलम् आशु यः करोति ।तम् इह शरणम् अभ्युपेहि देविदिवस करम् प्रभवो ह्ययम् प्रजानाम् ६-३३-३९

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