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वाल्मीकि रामायण 33.36

तस्य दृष्ट्वा मुखम् देवि पूर्ण चन्द्रम् इव उदितम् ।
मोक्ष्यसे शोकजम् वारि निर्मोकम् इव पन्नगी ।। ६-३३-३६।।

पूरा अध्याय