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वाल्मीकि रामायण 33.22

सम्नाह जननी ह्य् एषा भैरवा भीरु भेरिका ।
भेरी नादम् च गम्भीरम् शृणु तोयद निस्वनम् ।। ६-३३-२२।।

पूरा अध्याय