Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 33.14

अयुक्त बुद्धि कृत्येन सर्व भूत विरोधिना ।
इयम् प्रयुक्ता रौद्रेण माया मायाविदा त्वयि ।। ६-३३-१४।।

पूरा अध्याय