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वाल्मीकि रामायण 32.35

विजयस्व आर्य पुत्र इति सो अभिवाद्य प्रसाद्य च ।
न्यवेदयद् अनुप्राप्तम् प्रहस्तम् वाहिनी पतिम् ।। ६-३२-३५।।

पूरा अध्याय