ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 3232.33वाल्मीकि रामायण 32.33इति सा दुह्ख सम्तप्ता विललाप आयत ईक्षणा । भर्तुः शिरो धनुस् तत्र समीक्ष्य जनक आत्मजा ।। ६-३२-३३।।पिछलाअगलापूरा अध्याय