ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 3232.22वाल्मीकि रामायण 32.22कस्मान् माम् अपहाय त्वम् गतो गतिमताम् वर । अस्माल् लोकाद् अमुम् लोकम् त्यक्त्वा माम् इह दुह्खिताम् ।। ६-३२-२२।।पिछलाअगलापूरा अध्याय