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वाल्मीकि रामायण 32.15

तथा त्वम् सम्परिष्वज्य रौद्रया अतिनृशंसया ।
काल रात्र्या मया आच्चिद्य हृतः कमल लोचन ।। ६-३२-१५।।

पूरा अध्याय