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वाल्मीकि रामायण 27.32

विवर्तमानम् बहुशो यत्र एतद् बहुलम् रजः ।
एते असित मुखा घोरा गो लान्गूला महाबलाः ॥६-२७-३२॥

पूरा अध्याय