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वाल्मीकि रामायण 22.18

पन्नगैः सह दीप्त आस्यैः समुद्रः प्रत्यदृश्यत ।
स्निग्ध वैदूर्य सम्काशो जाम्बू नद विभूषितः ॥६-२२-१८॥

पूरा अध्याय