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वाल्मीकि रामायण 125.25

क्षिप्रमारोह सुग्रीव विमानं वानरै सह ।
त्वमध्यारोह सामात्यो राक्षसेन्द्र विभीषण ।। ६.१२५.२५ ।।

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