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वाल्मीकि रामायण 123.24

ततस्तु सा लक्ष्मणरामपालिता महाचमूर्हृष्टजना यशस्विनी ।
श्रिया ज्वलन्ती विरराज सर्वतो निशा प्रणीतेव हि शीतरश्मिना ।। ६.१२३.२४ ।।

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