ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 121121.8वाल्मीकि रामायण 121.8रावणेनापनीतैषा वीर्योत्सिक्तेन रक्षसा । त्वया विरहिता दीना विवशा निर्जनाद्वनात् ।। ६.१२१.८ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय