ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 121121.7वाल्मीकि रामायण 121.7नैव वाचा न मनसा नानुध्यानान्न चक्षुषा । सुवृत्ता वृत्तशौण्डीर न त्वामतिचचार ह ।। ६.१२१.७ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय