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वाल्मीकि रामायण 102.36

अब्रवीच्च परिष्वज्य सौमित्रिं राघवस्तदा ।
दिष्ट्या त्वां वीर पश्यामि मरणात् पुनरागतम् ।। ६.१०२.३९ ।।

पूरा अध्याय