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वाल्मीकि रामायण 102.16

नायं प्रेतत्वमापन्नो लक्ष्मणो लक्ष्मिवर्धनः ।
मा विषादं कृथा वीर सप्राणो ऽयमरिन्दमः ।। ६.१०२.१८ ।।

पूरा अध्याय