ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 101101.43वाल्मीकि रामायण 101.43सौमित्रिं सा विनिर्भिद्य प्रविष्टा धरणीतलम् । । ६.१०१.४३ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय