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वाल्मीकि रामायण 101.36

ततो रावणवेगेन सुदूरमवगाढया ।
शक्त्या निर्भिन्नहृदयः पपात भुवि लक्ष्मणः ।। ६.१०१.३६ ।।

पूरा अध्याय