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वाल्मीकि रामायण 10.12

स रावणम् महात्मानम् विजने मन्त्रिसम्निधौ ।
उवाच हितमत्यर्थम् वचनम् हेतुनिश्चितम् ॥६-१०-१२॥

पूरा अध्याय