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वाल्मीकि रामायण 1.5

प्रविष्टः सत्त्वमाश्रित्य जीवन्को नाम निष्क्रमेत् ।
को विशेत्सुदुराधर्षाम् राक्षसैश्च सुरक्षिताम् ॥६-१-५॥

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