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वाल्मीकि रामायण 1.4

देवदानवयक्षाणाम् गन्धर्वोरगरक्षसाम् ।
अप्रधृष्याम् पुरीम् लङ्काम् रावणेन सुरक्षिताम् ॥६-१-४॥

पूरा अध्याय