ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 99.27वाल्मीकि रामायण 9.27नादिताम् मत्त विहगैर् दिव्य गन्ध अधिवासिताम् । पर अर्ध्य आस्तरण उपेताम् रक्षो अधिप निषेविताम् ॥५-९-२७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय