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वाल्मीकि रामायण 9.16

जाल वात अयनैर् युक्तम् कान्चनैः स्थाटिकैर् अपि ।
इन्द्र नील महा नील मणि प्रवरवेदिकम् ॥५-९-१६॥

पूरा अध्याय