ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6767.12वाल्मीकि रामायण 67.12स दर्भं संस्तराद् गृह्य ब्रह्मास्त्रेण ह्ययोजयः । स दीप्त इव कालाग्निर्जज्वालाभिमुखः खगम् ।। ५.६७.१२ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय