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वाल्मीकि रामायण 61.8

यत्तन्मधुवनं नाम सुग्रीवस्याभिरक्षितम् ।
अधृष्यं सर्वभूतानां सर्वभूतमनोहरम् ।। ५.६१.८ ।।।।

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