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वाल्मीकि रामायण 61.7

प्लवमानाः खमाप्लुत्य ततस्ते काननौकसः ।
नन्दनोपममासेदुर्वनं द्रुमलतायुतम् ।। ५.६१.७ ।।।।

पूरा अध्याय