ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 66.45वाल्मीकि रामायण 6.45सुव्यूढ कक्ष्यम् हनुमान् प्रविवेश महा गृहम् ।पिछलापूरा अध्याय