ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 66.44वाल्मीकि रामायण 6.44मृदन्ग तल घोषैः च घोषवद्भिर् विनादितम् । प्रासाद सम्घात युतम् स्त्री रत्न शत सम्कुलम् ॥५-६-४४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय