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वाल्मीकि रामायण 6.39

ध्वज यष्टिभिर् आकीर्णम् ददर्श भवन उत्तमम् ।
अनन्त रत्न निचयम् निधि जालम् समन्ततः ॥५-६-३९॥

पूरा अध्याय