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वाल्मीकि रामायण 59.32

रावणाद् विनिवृत्तार्था मर्तव्यकृतनिश्चया ।
कथंचिन्मृगशावाक्षी विश्वासमुपपादिता ।। ५.५९.३२ ।।।।

पूरा अध्याय