ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5858.83वाल्मीकि रामायण 58.83तासु चैव प्रसुप्तासु सीता भर्तृहिते रता । विलप्य करुणं दीना प्रशुशोच सुदुःखिता ।। ५.५८.८३ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय