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वाल्मीकि रामायण 58.71

किंचिद्वीर्यं तवानार्य यो मां भर्तुरसन्निधौ ।
अपहृत्यागतः पाप तेनादृष्टो महात्मना ।। ५.५८.७१ ।।।।

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