ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5858.54वाल्मीकि रामायण 58.54स प्राकारमवप्लुत्य पश्यामि बहुपादपम् । । ५.५८.५४ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय