ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5858.47वाल्मीकि रामायण 58.47तत्र प्रविशतश्चापि कल्पान्तघनसन्निभा । अट्टहासं विमुञ्चन्ती नारी काप्युत्थिता पुरः ।। ५.५८.४७ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय