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वाल्मीकि रामायण 58.37

अधोभागे न मे दृष्टिः शोचता पातिता मया ।
ततो ऽद्राक्षमहं भीमां राक्षसीं सलिलेशयाम् ।। ५.५८.३७ ।।।।

पूरा अध्याय