ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5858.144वाल्मीकि रामायण 58.144तेन वध्यो ऽहमाज्ञप्तो रक्षसा रौद्रकर्मणा । मत्प्रभावमविज्ञाय रावणेन दुरात्मना ।। ५.५८.१४४ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय