Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 58.105

यथा श्रुत्वैव नचिरात्तावुभौ रामलक्ष्मणौ ।
सुग्रीवसहितौ वीरावुपेयातां तथा कुरु ।। ५.५८.१०५ ।।।।

पूरा अध्याय