ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5757.39वाल्मीकि रामायण 57.39एकवेणीधरा बाला रामदर्शनलालसा । उपवासपरिश्रान्ता जटिला मलिना कृशा ।। 5.57.39 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय