ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5757.16वाल्मीकि रामायण 57.16स पूरयामास कपिर्दिशो दश समन्ततः । नदन्नादेन महता मेघस्वनमहास्वनः ।। 5.57.16 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय