Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 56.31

किन्नरोरगगन्धर्वयक्षविद्याधरास्तदा ।
पीडितं तं नगवरं त्यक्त्वा गगनमास्थिताः ।। 5.56.31 ।।।।

पूरा अध्याय