ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5656.25वाल्मीकि रामायण 56.25स मारुत इवाकाशं मारुतस्यात्मसम्भवः । प्रपेदे हरिशार्दूलो दक्षिणादुत्तरां दिशम् ।। 5.56.25 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय