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वाल्मीकि रामायण 56.2

ततस्तं प्रस्थितं सीता वीक्षमाणा पुनः पुनः ।
भर्तृस्नेहान्वितं वाक्यं हनुमन्तमभाषत ।। 5.56.2 ।।।।

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